Lahsun aur Kapoor - yodi dong

Lahsun aur Kapoor

लहसुन और कपूर 

Mr .जय राज दुबे ,हमरे होटल की दरवान थे। मैन गेट मे खड़ा रहत्ते थे,लम्बाई छ  फिट दो के होंगे। शीना ५६  इंच था,सर पे पगड़ी और ऊनीफॉर्म भी था देख ने लायक। हमेरे होटल की प्रमोशन था वह। किउ की उनके मुछे थे देखने की लायक। ये चव डे ,घने काले। उन्होंने मुझे बोले थे की मुछ कला रखने के लिए क्या क्या जड़ी बूटी मिलाके  तेल बनाते थे फिर उशसे रोज मालिश करते थे आपने मुछे  क ,टिप्स भी कमाते थे तगड़ा। दूसरे गार्ड लोग जलते थे उनकी कामयाबी के ऊपर। जय राज जी हस्ते थे और कहते थे ,मेरे जैसा तुमभी बनो और फिर कमाओ न,मैं कहा तुम्हे रोक रहा हु। 
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कपूर 

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लहसुन 
 साल भर हम नहाते थे गरम पानि  मै।सर्दी के धत है मेरे ,थोड़े से ही ठण्ड लग जाता था। फिर खासी सुरु,छीक आना और सासे फूलना चालू होता था। एंटीबायोटिक सुरु करना पड़ता था,नहीं तो चलना फिरना मुश्किल होता था। .डॉक्टर एडवाइस देते थे रेस्ट के लिए,धुआँ ,धूल से दूर रहने के लिए,किचन के काम छोड़ के banquet मैनेजर इस लिए आये मैं। क्या बलू जिंदगी इस की  कारन मैं मेरे ,थोड़े दाल था,मन की जोर से उसे हटा के काम करता था मैं। बिच बिच मैं ऑफिस छुट्टी करना पड़ता था। जी .एम्  सर बोलते थे भत्ता पूरा चेक उप कराओ अपने बॉडी की। और क्या करू भाई ब्लड टेस्ट ,x ray के बंडल बन चूका था ,छ महीने के उम्र से भोग ता था ,मुक्ति न मिले। माँ की रोना, बाबा परेशान,घर वाले कहते थी ेसे बीमार आदमी से सादी  हुआ की सर्दी का मज़ा ले ने पाए..  

 तो ऐसे ही एक सर्दी के मौसम मैं। शादी के मौसम भी था,मैं बीमार पडा ,बरी तकलीफ से ऑफिस आता था चुस्ती फुर्ती मन था ही नहीं। दूबे जी मुझे देखे और हल पूछा,मैं उनको बोले थे तकलीफ की  बात.तब उन्होंने मुझे बोलै साब,पहले किउ नहीं बताये मुझे। काल सुभे उठते ही ,बाथरूम जाओ। एक लहसुन के दाने (ONE क्लोवे ऑफ़ गार्लिक )पानीके साथ गा टाक  लो। फिर एक गिलास पानी पीओ। दो घंटे तक कुछ नहीं खाना ,उसकी बाद जो खाते हो ओह खाओ,कोई परहेज़ नहीं है। साम  को मैं थोड़ा सा कपूर ला दूंगा छोटा बोतल मैं रख देना और सास के प्रॉब्लम लगते ही उसे बारा  बार सुंग लेना। फिर देखो क्या होता है।  
  आज कितने दिन होगये मैं  दिल्ली से कोलकाता आ गए ,जब भी मुझे सर्दी जैसे लगे तोह एक ये दो लहसुन के दाने  सुबह खली पेट ले लेता हु,चबाना नही ,गटक  जाता हु। और कच्चे कपूर (जो पूजा मैं लगतहै )Inhale  करता हु ,मैंरे भुगत न बन्दों हो चूका।  

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