Mothers day date 2019 in india - yodi dong

Mothers day date 2019 in india

                                                    Mothers day date 2019 in India:-

मदर्स   डे की ड्रामा बांध करो भाई! हम इंडियन है, हमारे माँ की दिन रोज़ है। तुम ूँरेज लोग आपने माँ को साथ में नहीं रख ते हो ,तुम मनाओ इ सब ,हमारे माँ तो हमारे साथ इ होते है ,उनके लिए अलग से दिन मानना पड़ते नहीं। बाह ,बढ़िया इंडियन भाई मेरा ,आज खाना क्या बने थे घर में ?मेरे घर में ?हाँ आपके घरमे -वही रोटी और सब्जी ,सब्जी कौन सा ?अरे भाई में जो सब्जी ऑफिस में लाया ,वही। अच्छा दोपहर को आप के माँ आज यही सब्जी के साथ, चावल ये रोटी खाये है ?में चुप हो गए। बाकई  कभी ऑफिस से घर पहुँच के नहीं पूछा माँ को, की माँ आज क्या खाये हो ,आखिर किउ ?कितना बिजी हु में ?
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मदर्स डे 
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मदर्स  डे की शुरुआत 
अन्न जर्विस थे एक अमेरिकन स्कूल टीचर ,उनके माँ अन्न रिवेस जार्विस थी एक सेबा ब्रत्य लेडी ,सैनिक को सेवा किये थे उन्होंने ,जिंदगी भर। उनकी काम को मान देने के लिए बेटी अन्न जार्विस लड़ाई किय्र और फिर सुरु हुआ दुनिया भर में  मदर्स डे। दुःख की बात तो यही है की -अन्न जूनियर की मौत हुआ उस मदर्स डे को बाणिज्यी करन करने के कारन ही। मई महीना की दूसरे हफ्ते होता है मदर्स डे.१२थ मई था इस साल मदर्स डे। संडे होते है। 
अन्न लड़े उन लालची लोगो के साथ ,कार्ड देके मदर्स डे नहीं होते ,उसमे आप लोगो की कमाई हो रहा है ,लेकिन माँ जो हमे पला पोसा है सालो साल, उनकी सन्मान नहीं होता। उनकी प्यार का सहारा चाँद पैसे की कार्ड नहीं है !

मदर्स डे की मूल कारन है प्यार देने वाली माँ को ,ढेर सारा प्यार देना उस दिन। उनको हमे ा समझाना है ,की माँ तुम्हारा प्यार हम कभी नहीं भूले है ,तुम सबसे पहले हो,प्रायोरिटी में भगवन से भी आगे हम इंडियन  रखते है। घर में सबसे पहले खोज -आरे माँ कहा है?खेल छोड़के  तुम हरे पास आना सबसे पहले ,बीमारी में माँ  को छोड़ न नहीं,पास बिठा के रखना है। हमारे मदर्स डे रोज़ है !

फिर भी हमारे भिज कुछ होते है जो माँ को छोड़ जाते बृद्धा आश्रम में?बड़ा डर लगते है कही ये बीमारी हमारे समाज में एपिडेमिक न बन जाये?
२००४ साल ,नई दिल्ली। जनक पूरी में रहता हु में ,एक सरकारी करने वाली अंकल और आंटी के घर में रहता हु। अंकल की माँ को बिना कूलर के ,रहना पड़ता है टॉप फ्लोर  की रूम में। आंटी ने ऐ बन्दों बास्त कर दिए। जब हम दिल्ली के इतना गर्मी में a.c में रहे नहीं पाते, तब उस ७५ साल की बुजुर्ग को रहना पर  रहा है टॉप फ्लोर में। एक रात को दो बजे ऑफिस से घर आये हम। फिर नहाने चले बाथरूम में ,लाइट ऑन  करने से पहले आवाज़ आये ,लाइट ऑन  किये तो देखा --वह माँजी पड़े है सीढ़िया के ऊपर,चिल्ला के अंकल आंटी को उठाये। उनको उठाया.,डॉक्टर बुलाये उसी रात को। कुछ बोल नहीं पाए उनको ,आंटी खुद दो बचे की माँ है! मदर्स डे इनके लिए कुछ मायने नहीं रखते अन्न जर्विस !आप के माँ और आप जैसे बहुत है हमारे इंडिया में। ,mr. बक्सी ए ग्रेट बिज़नेस मन ऑफ़ कोलकाता ,आपने माँ की पैर में रोज़ तेल मालिश करके फिर वह आपने कमरे में जाते थे ,में इनको भी आपने आँखों में देखा। पूरी और कोलकाता में उनकी होटल्स है। 

 ज्यादा सा इंडियन के घर में रोज़ होते है मदर्स डे  ,किउकी हम मानते है माँ स्वर्गा दोपि गरीयसी है। 

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