Saturday, August 24, 2019

first lady doctor of India

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first lady doctor of India


ए कहा जाता है की ,हर सफल पुरुष के पीछे एक महिला होती है ,लेकिन आनंदी बाई  जोशी के sucess के पीछे था एक पुरुष ,उनका husband गोपाल रओ  जोशी थे। और आनंदी को first lady doctor of India कर चुके थे। जब पति अपना पत्नी को पिट ते थे खाना मन पसंद न होने की कारन ,तब की समय पे गोपाल रओ डांटते थे आपने पत्नी को पड़ा   न करके खाना बनाने के कारन!


1865 साल की 31 मार्च को यमुना एनी आनंदी बाई जोशी का जनम हुआ था कल्याण में। शुरुआत की जिंदेगी तो अच्छा ही था लेकिन फिर सुरु हुआ थे जिंदगी में एक नया मोड़। इकोनोमिकल प्रॉब्लम फेस कर रहे थे पारिबार उनके। घरवाले सिर्फ नौ साल की उम्र में ही उनकी शादी करवा दिए थे। शादी हुआ थे उनसे उम्र में 20  साल बड़ा गोपाल रओ जोशी से, जो बिपत्नीक भी थे। 

खेलने की उम्र में किसीके घर संभल ने की दाय आ पड़े थे आनंदी की ऊपर। लेकिन गोपाल रओ जी आपने बीवी को पढ़ाने  की खोयाब फाइनल कर चुके थे। 1875 साल में महिलाओ  की पड़ना लिखना बहुत ही बुरा माना  जाता था। उसी समय गोपाल रओ जी आपने बीवी को समझते थे पड़ने के लिये ,समझते थे समाज की बाकि सरे महिलाओ के सामने लिखाई ,पढ़ाई की ख़ूबीए पेश करने के लिए। समाज में आगे आने की नेवता देने के लिए। 

अज्ञान की अँधेरे में हमारे समाज डूबा था उस समय पर। महिला ओ को शिक्षा  तो  दूर की , आपने घर के दरवाज़े  से बहार आने  देते  नहीं थे। आनंदी गोपाल जोशी के लिए भी पड़ना  और फिर डॉक्टर होना बहुत ही मुश्किल था। बहुत ही बाते और मुस्किलो की सामना करना पड़े इस जोशी परिबार को ,समाज  में ज्ञान की उजाला लाने  में। 

14 साल की उम्र में आनंदी बाई माँ बनी थी। एक लड़का का जनम दिए थे वह। लेकिन सिर्फ दस दिन ही जीबित था वह बच्चा। बिना चिकित्षा में बच्चा जिबैत न रहे थे। उस दस दिन की उम्र का बेटा ,आपने माको मोटीवेट कर गए -डॉक्टर बनने के लिए। बेटा  खोने की गम से  आनंदी बाई तेजी से सुरु किया डॉक्टर होने की लड़ाई। और किसी के बच्चा न मरे बिना ट्रीटमेंट में ,और कोई  माँ आपने बच्चा न खो दे। 

 Woman's Medical College of Pennsylvania में डॉक्टरी पड़ना सुरु किया उन्होंने। जिस समय पे कोई भी आदमी नहीं जाते थे बिदेश,धरम छूट होने के डर  से ,उस समय , आनंदी बाई की पति उनको भेज दिए बिदेश डॉक्टरी करने के लिए। आनंदी बाई जोशी दो साल के डॉक्टरी डिग्री लेकर भारत लौटा। भारत के  पहले महिला डॉक्टर बने वही ,आनन्द गोपाल जोशी,MD....... लेकिन 19 साल की उमर में ,बिदेश में पड़ने की समय खान पान की ठीक नहीं था,ऊपर से अमेरिका के वेअथेर भी उनको सूट नहीं कर रहे थे। Tuberculosis (TB) की चपेट वह आ गए थे। 


कोलकाता में पोस्टिंग थे गपोल जोशी की। आनंदी गोपाल यंहा बीमार हो रहे थे जल्दी जल्दी। दुर्बल भी हो रहे थे। जब गोपाल जोशी को श्रीरामपुर में ट्रांसफर हुआ ,तब उन्होंने आनंदी जी को अमेरिका भेजना चाहा फिर से -उनकी चिकित्सा के लिए। किउ की स्वास कि प्रोब्लेम,बुखार और सर दर्द होता था उनको। 

आनंदी गोपाल जोशी ,रिक्रूट हुए  थे Albert Edward Hospital के  physician-in-charge of the female ward में। आपने डॉक्टरी उन्होंने यंहा पे सुरु किये। लेकिन बाद किस्मत भारत बसिओ की इस मोहिवासी ज्यादा दिन बचे नहीं। अमेरिका से मेडिसिन भेजा गए थे ,पर वह मेडिसिन काम न आये। 22 साल की वह होने से पहले ही - गुजर गए ,26 फेब्रुअरी 1887  को। भारत बर्ष खो दिए एक महान नारी को। 

कल्याण में ही वह अपना आखरी स्वास लिए थे। उनकी चिता  भष्मो (Ashes  ) रखा है NEW YORK में। भारत  खो दिए फर्स्ट लेडी डॉक्टर ऑफ़ इंडिया को ,डॉक्टर बनने की एक साल के अंदर। इस great  नारी आजभी हमारे सोसाइटी के सामने ज्ञान की बत्ती लेके चल रही है ,और सभी नारीओ को कही रही है ,आगे बड़ो समाज की अँधेरा दूर करो ,शातो कोटि प्रणाम आपको। 


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