Wednesday, August 21, 2019

janmashtami 2019

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janmashtami 2019

                  जन्माष्टमी 2019


जब मूसलाधार बारिश हो रही थी। पृथ्वी को निगल लिया गया था, तब पृथ्वी पर शासन करने के लिए धरती को उत्पीड़न  से मुक्त करने के लिए भगवान विष्णु की धरती पर जन्म लिया। ) हिंदुओं का प्रमुख त्योहार है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, सृष्टि के देवता श्री हरि विष्णु के आठवें अवतार,नट खाट नंदा लाला जनम लेते है धरती में। इसी छान  को श्री कृष्ण जयंती या जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है।

भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। यदि आप आठवीं तारीख को देखते हैं, तो यह 23 अगस्त को जन्माष्टमी होनी चाहिए, लेकिन अगर रोहिणी नक्षत्र में विश्वास करते हैं तो 24 अगस्त को कृष्ण जन्माष्टमी होनी चाहिए। आपको बता दें कि कुछ लोगों के लिए, आठवीं तिथि का महत्व सर्वोपरि है, जबकि कुछ लोग रोहिणी नक्षत्र होने पर ही जन्माष्टमी का त्योहार मनाते हैं।इस साल जन्माष्टमी 2019 के शनि बार और रबिबार दो दिन मन सकते हो।

हम भारत वासी भगवन को कोभी बेटा  ,कभी पति ,कभी माता के रूप में सालो से पूजते आ  रहा है। चमत कर तो यही है के, भगवन को भी हमारे चाहत पूरा करने के लिए उसी रूप में आना पड़ा। इसी लिए ,मातारानी आपने माँ की  तरह है ,भगवन शिव पिता ये पति की तरह पूजा जाता ,और भगवन बिष्णू होते है हमारे घर घर के दुलाल। सिर्फ श्रद्धा और भक्ति से मिल जाते है ये महा शक्ति ये ,यही हमारे बिस्वास  है सालो से।

मंदिरो में रात से ही पूजों सुरु हो जाते है ,और सुभे पूजा होते है घर घर में। नटखट नन्द   लाला के लिए छप्पन भोग की आयोजन किया जाते है,मख्खन और मिश्री दिए जाते उस भोग के साथ। पूरी जग्गत नाथ को मैंने देखे है छप्पन भोग रोज़ देता था ,उनके सेवा में। भगवन के भोग देता जब पुजारी ,तब किसी एक थाली में से तीन ऊँगली के बराबर कोई उठा लेता भोग!कहते है भगवन खुद लेते है वह। मिटटी के छोटे हांडी ,एक के ऊपर एक बिठाते है,और अस्चार्जो ए है की ,ऊपर की हांडी सबसे पहले तैय्यर  हो जाते है,ए मेरा आँखों देखा है।

नंदा लाला की प्यारा है उनका झूला। हर कोई उनको एक झूला देते है ,कोई फूलो से बना हुआ ,तो कोई धातु से। श्री कृष्णा जनम तिथि हम मानते है प्यार और सेवा की रूप में। पालन हारी श्री हरि आये थे पृथिवी में प्यार सीखा ने के लिए ,दुस्ट कांगशा को बढ  करके शांति और प्रेम के प्रचार किये थे  उन्होंने।


में बहुत सामान्य जीब हु धरती के ,उनके बारे में क्या बताऊ सिर्फ चार लाइन में उधर कर रहा हु ,कवि रामधारी सिंह दिनकर ने भी कविता लिखी। दिनकर के महाकाव्य 'रश्मिरथी' के तीसरे उपदेश में इस पूरे संदर्भ को खूबसूरती से समझाया गया है। कृष्ण की चेतावनी ’कविता को लोग आज भी पसंद करते हैं। हो सके तो जरूर पूरा कबिता आप पड़ना. .......

यह देखो, आकाश मुझमें है,
देख, हवा मुझमें है,
मेरे विलय को सुना जा सकता है,
मेरे पास दुनिया के लिए एक लय है।
मुझमें अमरता बढ़ती है,
विनाश मुझ में निहित है।

हे जुग पुरुष प्रणाम आपको ,शातो कोटि प्रणाम  आपके चरण में। ये धरती झूम उठे आप के जनम तिथि पे ,पूरा देश  तथा ए धरती आपके आशीष से भर जाये। नंदा लाला आपके मीठी मीठी नूपुर की धुन से ये  धरती को मोहित करे ,मेरे माँ बैठा है मख्खन मिश्री सजा के तुम्हारे लिए ,आजाओ प्रभु ,आ जाओ। .........

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