motivation and emotion of a hotel industry staff - yodi dong

motivation and emotion of a hotel industry staff



motivation and emotion of a hotel industry staff. 

एक होटल उद्योग के कर्मचारि की प्रेरणा और भावना.


-'सर ये मेरा क्या हो गये सर ? बिरजू रोते हुआ पूछ रहा है मुझे।
-'आ रे ,बिर्जु रोना बंद करके येतो बताओ ,हुआ क्या?'
-'सर ,मीता को ब्लड कैंसर हुआ ,डॉक्टर बोल रहा है'...
बिरजू मेरा जूनियर है ,इस होटल में। में कोलकाता के इस इटलियन होटल में काम कर रहा हु पिछले चार साल। होटल इंडस्ट्री में बहुत ही नाम कमाए है ये। पैकेज अच्छा ,सबसे बड़ी बात होटल चलता है फोरेनर मालिक कि बनाया नियम में ,जो की फॉरेन कंट्री में लागु है ,उसकी तरह ही।



बिरजू की बीवी पिछले हप्ते से बुखार में भुगत रहा था। नर्सिंग होम दिए थे ,डॉक्टर बोले पहले की डेंगू हुआ,ब्लड सेल कम होगये। ट्रीट मेन्ट चालू किया ,डिटेक्ट हुआ ब्लड cancer जैसे खातिर नक् बीमारी।सुनते ही बिरजू टूट पड़े। दो साल की बेटी भी है उन दोनो की। साथ में बुजुर्ग माँ और बाबूजी। मीता diagonosis सेण्टर में काम करता था।

बिरजू की फ्लैट है कोलकत्ता दक्षिण में। मेरे ज्वाइन करने से पहले ही उसने शादी किया था। जोड़ी खूब सूरत है ,जिस कारन उन्दोनो के बच्चे भी बहुत ही सूंदर है। बिरजू सदा हंसमुख था ऑफिस में। मीता की मई के है ,कालीघाट की तरफ। माँ,बाबा है नहीं। एक भैया और भाबी है उसका।



service industry की लड़ाई


बिरजू दूसरे दिन ही ऑफिस आये। हम सब G.M को रिक्वेस्ट किये उसकी छुट्टी के लिए। में रिस्पांसिबिलिटी लिए हमारे डिपार्टमेंट की। बिरजू को खुलि छूट दिए कि वह हॉस्पिटल की काम ख़म करके ही ऑफिस आये गा रोज़ ,मेरे ड्यूटी के बाद भी में ऑफिस में उसका काम कर दूंगा। पैसे की हेल्प हम सब आपने सैलरी से करेंगे। M.D भी दिए अच्छा रकम ट्रीटमेंट के लिए। जब भी उसको जरुरत पड़ेगा वह हॉस्पिटल में जा पाएगा।

                              खून की  जरुरत पड़ता है ,इस बीमारी में जल्दी जल्दी। उसका इंतेजुम के लिए बहुत सरे ब्लड डोनेशन कार्ड जुगाड़ करदिया गया। लड़के सारे ब्लड डोनेट भी कर दिए। पोची बना के देता था हॉस्पिटल वाले और बिरजू भागता था ब्लड बैंक में ब्लड के लिए। फिर एक बाल्टी में बर्फ  की पैकेट रख के और उसके बिच ब्लड के पैकेट रख के ले जाना पड़ता था। फिर वह ब्लड चढ़ाये जाता ,मीता को। 



में बिरजू को बोलै था -बिरजू ए लड़ाई  तुम्हारे और तुम्हारे बीवी की। आश छोड़ना नहीं। डॉक्टर लोग लड़ाई कर रहा ,साथ में तुम दोनों भी करो। फर्स्ट स्टेज में पकड़ा गए बीमारी ठीक हो जय गा। खाना पीना छूट गए थे बिरजू की ,आपने बीवी को बचने की लड़ाई में। उसकी दो साल के बच्ची की देखभाल करता था उसके माँ और बाबू जी ने। छोटी सी बच्ची पूछते थे -'बाबा ,माँ कब आये गा,कितने दिन देखे नहीं माँ को?'


बिरजू ऑफिस में आके  मुझे बताते थे और रोते  था। फिर हम हिम्मत देते -'बिरजू रो मत ,ESI sanctioned  कर दिए। कैंसर हॉस्पिटल में भर्ती हो गया। Dr. गुप्ता बहुत ही नामी  है इस बीमारी के ट्रीट मेन्ट में ,ठीक हो जायगा'। ठीक हो जायगा सुनके बिरजू मेरे तरफ देखता था। -'आबे ठीक नहीं हो गए तो हॉस्पिटल भेजा किउ ,मरने के लिए ?चल जा काम में लाग जा'। में भी पूरी तरह बिस्वास नहीं कर पता था की ठीक हो जायगा  मीता। 



ट्रीटमेंट चालू हुआ ---कोलकाता दक्षिण के ये cancer हॉस्पिटल फेमस है।पूरा भारत से पेशेंट आते इंहा। तरह तरह के कैंसर पेशेंट है इन्हा। केमो देना डॉक्टर चालू किये ब्लड देने के बाद से। धीरे धीरे मीता  के बाल सरे झाड़  गए। आपने बच्ची को मिल ने के लिए रोटा था। डॉक्टर सीधा न बोल्दिए। दो साल की बच्ची भगवन के तस्बीर के  आगे बोलता था माँ को घर भेज दो जल्दी ,जल्दी। त्रेअत्मेंट में असर आना चालू हुआ। और पूरा साल भर के बाद उसको डॉक्टर घर भेजा। हर महीना विजिट करेगा जरूर हॉस्पिटल को। 

बहुत सरे दवाई और नियम के साथ उसको भेज दिए घर। घर में आपने बेटी को वह टच नहीं करता था। बिरजू को नज़दीक आने नहीं देता ,--कहता चेमो की जहर मेरे सरीर में है ,कोई नज़दीक नहीं आओ गे। 
--'बेटी कहता था ,-माँ एक  बार तुम्हारा हाथ टच करू?
मीता jesus को  बिस्वास किया बीमारी के समय ,उसको हिम्मत और ताकत मिले थे उनसे। अब उनको भी आराधना करता है। फ़ोन में मैंने उसे बोलै था --मीता ,रिकवर करने में थोड़ा टाइम लगेगा ,लेकिन हिम्मत रखो खुशिया जरूर लौटेगा। धीरे धीरे उसका हेल्थ ठीक हुआ। सर में बाल उग रहा था फिर से। नार्मल लाइफ में फिरसे सेट हो रहा था बिरजू,मीता और उनके बच्चे। बिरजू की मम्मी और पापा भी चयन प् रहा था। 

हैप्पी एंडिंग ----आज फिर बिरजू और उसकी फॅमिली नार्मल लाइफ लीड कर रहा है। में जान पूछ के उनके नाम चेंज करके इसे लिखा। में देखा था बहुत दिनों तक बिरजू की घर में उसकी रिलेटिव कोई,कोई पानी तक नहीं पिटे थे। मीता  की बनाई हुयी खाना नहीं खाते  थे। डर और अज्ञान हमे कभी कभी मानबिकता भुलवा देते है। डर स्वाभाबिक  है, लेकिन उसे हबी  नहीं होते देना ,नहीं तो जिंदगी की मजा निकल जाते है। 

 बिरजू की बेटी आज छे साल हो गए ,मीता की बाल फिर से लम्बी हो गए। बिरजू एक स्कूटी ख़रीदा ,आपने बीवी और बच्ची को लेकर घूमते है। डॉक्टर के पास अभी तीन महीना में एक बार जाना होता। डॉक्टर साब देखते ही कहते उसे -आरे मीता घर जाओ अब छे महीना बाद आना ,अब तो ठीक हो गए हो !!!!!






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