Hindi Stories for Kids of Today's who loves ghost story - yodi dong

Hindi Stories for Kids of Today's who loves ghost story

https://www.kakolib.com/2019/11/hindi-kids-stories.html
Hindi Stories for Kids 

                     Hindi   Kids Stories 
-ये लड़का न किसी भी दिन पेड़ से गिर के हाथ पैर टूटे गा,देख ले न तब आके इसके घरवाले हमे हि चार बाते सुनाय गा !  
-क्या बोल रहे हो चाचा जी ?
-ये लड़का रोज़ आके बेल के इस पेड़ में ऊपर पैर और नीचे सर करके लटक ता है। किसी भी दीन पैर अगर स्लिप हो गए तो ,जमीं में धूम होगा ,और कुछ न कुछ  टूटे  गा  जरूर। 
-तभी तो मैने, मना किया इसको ,मत चङो पेड़ में----
आज सबसे शेयर कर रहा हु दुनिया के ग्रेट स्पिरिचुअल एंड सोशल लीडर स्वामी विवेकानद जी की बचपन की हिंदि स्टोरीज ।  

स्वामी विवेकानंद जी ,जिनका नाम था नरेंद्र नाथ दत्ता, सन्यास होने से पहले।  दादाजी का  नाम था दुर्गा चरण दत्ता ,संस्कृत और पर्सियन भाषा में ज्ञानी था। युवा काल में ही उन्होंने संसार त्याग दिए थे। नरेंद्र नाथ जी की ,पिताजी का नाम था विश्वनाथ दत्ता ,वह थे कोलकाता हाई कोर्ट की अटोर्नी। माता था भुबनेस्वरी देवी। कोलकाता में उनका जनम हुआ था ,1863 साल की 12 जनुअरी ,मकर संक्रांति के दिन। आठ नंबर संतान थे वह। 



बचपन में नरेन् बहुत हिम्मतवाला था। किसी भी चीज़  में डरते नहीं थे। उस टाइम पे इतना पापुलेशन था नहीं। कोलकाता था सुना सुना। सूरज ढलते ही रास्ता खली हो जाता था। बिजली था नहीं ,सियार और डोगी भोकते थे। वैसे की दोपहर को जब लोगो होते थे ऑफिस ये स्कूल में ,रास्ता हो जाता बिलकुल खालि। इसी लिए बच्चों को बहार निकल दिया जाते नहीं थे,दोपहर को। 

नरेंद्र नाथ लेकिन दोपहर को अकेले घूमते थे रास्ता में। एक बेल की पेड़ में ,चढ़ जाते और बैठेरहेते थे अकेले उसमे। कभी कभी अपने प्यार के सहारे वह लटक ते थे। ुस्तिमे उनका पैर  ऊपर और सर होता निचे की तरफ ,सईद दुनिया को ुतली दिखना उनका सुरु तबसे। भबिष्वा में जो दुनिया को देखेंगे दूसरी तरफ से ! 

लेकिन बेल पेड़ की मालिक जो थे , वह डरता था कही ये बच्चा गिर न जाए पेड़ से। उन्होंने खूब डाटा पहले पहले। नरेन् के साथ दो चार लड़का भी उस पेड़ में चढ़ता था। सब के भलाई के लिए ही ,मना  करते थे पेड़ में चढ़ने  को। लेकिन बच्चे और खाश  के नरेन् उनके बातो में आये नहीं। तब उस आदमी ने एक कहानी बनाया और बच्चो को सुनाये। 

बच्चो को उन्होंने बोलै की -ब्रह्मा दैत्य (ब्राह्मण भुत ) इस बेल की पेड में रहते है। उनके आराम का टाइम पे जब भी कोई उनको डिस्टर्ब करे तो वह नाराज़ हो जाते ,और गुस्से में आके ओह नुकसान पौ चाहते है !तुम लोग इस पेड़ में चढ़ना छोड़ दो और दोपहर को तो बिलकुल ही नहीं। उनकी नाराज़ गई की कोप से बचो ,कुछ होगा तो उसकी दाय भर तुम्हारी आपने है। 

बच्चो ने उनकी बोल ने की तरीका और हाथ पैर और आंखोकी इधर उधर गुमना उनको डरा दिया। कोई भी और पेड़ में चढ़ नहीं रहा था,पिछले दो दिन । टोटका काम आगये !वह बुजुर्ग आदमी सोच रहा था ,दोपहर के नीद में कोई तकलीफ था नहीं ,बच्चोकी शोर  भी नहीं था। लेकिन ये क्या एक बच्चा उस पेड़ में बैठा है न?

-आरे ,नरेन् -बुजुर्ग बोलै "तुम  नहीं सुना ,उस ब्रह्मा देत्य  (ब्राह्मण भुत ) की कहानी ?
-दादा जी ,सुने तो थे आप से ,तभी तो पेड़ में दोपहर  को ही चढ़े  बैठा हु पिछले दो दिन ,कोई ब्रह्मा देत्य (ब्राह्मण भुत )  नहीं मिले अभी तक ,आपने आँखों से पहले देखु उसे, फिर न बिस्वास करू,ब्रह्मा दैत्य होते है की  नहीं !

रामकृष्ण मिशन के प्रतिष्ठता और रामकृष्ण देव की परम भक्त स्वामी विवेकानंद जी के बचपन की कहानी। दुनिया  के सामने वेदान्त और मानव सेवा की एक नया रूपाकार थे वह। उन्होने बोलै -उठो ,जागो और और आपने को पहचानो। ... एक नायक की तरह  बोलो ,मेरा कोई डर नहीं है....... 

Mera blog padke aapko kaise laaga,please comments kijiye.




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