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moral stories in Hindi language

             बिधबा मा की कटी हुई शर.......   कहानी हिंदी भाषा में 


दुनिया में जितने सरे अच्छे कहानी पड़े है हमने ,एहि कहानी मेरे १५ साल की उम्र में पड़ा हुआ बेस्ट है। ाजमुझे याद नहीं वह किनका लेख था ,लेकिन मेरे पड़ने की इच्छा को, एहि सरे कहानी खाद दिए थे। रबीन्द्रनाथ टैगोर की लिखा हुआ कहानी ,शरत  चंद्र के लिखा हुआ कहानी,बंकिम चंद्र की कहानी मेरे ज़िन्दगी की उस समय को ,आपने बैश में ले लिए थे ,पड़ने की इच्छा इनके कारन ही बड़ा था। फिर नेशनल और इंटरनेशनल लेबल के राइटर की writting  मुझे धनि बनाये है !एक नीति कहानी हिंदी भाषा  में उसी समय के पड़ा हुआ है,शेयर करते है आप सबके साथ। 
एक गाओं में एक बिधबा माँ रहती थी ,आपना इकलौता बेटे के साथ। पति गुजर गए थे उनके ,जब बेटा  था एक साल की। लेकिन हिम्मत  नेही हरी थी उन्होंने। बेटे को पलने के लिए कपडा सिलती थी वह। समय था राजाओ के राज  की। घर चलते थे वह,साथ में बेटे को भी पल रही थी। दूसरा कोई रिस्तेदार भी उनके थे नहीं ,जो उन्हें मदद कर सके। अकेले ही लड़ रही थी वह,जिंदगी के साथ। बेटे ही था उनका जीने का मकशद। 

बेटे भि आपने माँ के अलवा दूसरे किसी को जानते ही नहीं थे। पडोसी के बच्चोके साथ खेलते खेलते अगर माँ की याद आये तो ,सीधा भागते हुआ आपने माँ के पास आ जाता था। उसका नाम था अजय। प्यार से माँ बुलाते थे 'आजु' कहे के। आजु की दुनिया था उसकी माँ ही। कभी भी आपने माँ को दुःख दिया नहीं उसने।  अपने माँ को बार बार कहते थे अजय -माँ में बड़ा होक काम करूँगा खूब,तुम आराम करना ,माँ के आँख उसकी बातो से भर उठता था!




दिन गुजरते गए ,देखते देखते अजय हो गये युवा पुरुष।अब वह चाहते है आपने खुद काम करना और माँ को आराम देने को,लेकिन माँ ज़िद पकड़ के बैठी है की, पहले गुरुकुल में जाके  अपना शिक्षा पूरा  करे।  .फिर काम करेगा। गुरुकुल में शाश्त्र और अस्त्र की शिक्षा  मिलते थे ,उन्हा  पे राजा और प्रजा सबको ही बिद्या मिलते थे उस ज़माने में। इसमें कोई  भेदा भेद  नहीं था।सफल छात्रा को राजा के पास नौकरी मिलते थे।

अजय को आपने इच्छा के बिर्रुध में गुरुकुल जाना पड़ा। उसकी बिनम्रो आचरण गुरुकुल सिक्षाक लोगो की नज़र
छीन  लिए। धीरे धीरे गुरुकुल में वह प्रियो होने लगे सबकी।और तभी आये गुरुकुल में देश की राजकुमारी ,आपने शिक्षा के लिए। वह भी सुंदरी थी ,और बुद्धिमती भी।उसका नाम था बिदिशा। राजा के इकलौते बेटी। बड़ा प्यार से पला था उसे। स्वभाबिक रूप से राजकुमारी सिंहासन के हकदर थी।




कौन जाने कैसे अजय और बिदिशा के अंदर दोस्ती बने ?किउ की ,एक था गरीब बिधबा माँ की लड़का ,और दूसरे थी राज कुमारी। फिरभी दोनों में प्यार हुआ,और प्यार बढ़तेहि गए दोनों में। शिक्षा खतम होनेके बाद ,दोनों ही आपने आपने घर लौटा वह। फिर अजय काम में लगे राजा के पास। बिदिशा के साथ मिलते है रोज़। फिर अजय शादी के बात छेड़ा बिदिशा के पास.लेकिन बिदिशा चुप थी।

दिन गुजरते गए ,लेकिन बिदिशा शादी के लिए राजी नहीं हो रहा था। फिर एक दिन जब अजय बोलै-येतो आज तुम है बोलो हमारे शादी के लिए ,येतो में नौकरी छोड़के आपने माँ को लेके दूसरे देश च ला जाऊंगा।   बिदिशा
बोलै -में तुम्हे शादी करने में राज़ी हु लेकिन। ... अजय बोलै -क्या लेकिन ? बिदिशा धीरे से बोले -'तुम्हारे माँ के मुंडी अगर तुम काटके लाओ गे   तोहि ' .......





अजय चुपके से घर वापस आ गए ,फिर चुप  हो गये। खाना  कम हो गए , नौकरी जाना बंद कर दिए। माँ के नज़र में सब आये। पहलेतो सोचा बेटे की तबियत ख़राब  है ,फिर धीरे धीरे माँ सब कुछ जान लिए बेटे से। बेटे को माँ बोले -'अजु खाना खाओ नौकरी में जाने की तयारी करो ,में राजकुमारी को  राजी करवाउंगी'।   .अजय खाना खाके तैएर हुआ और माँ से मिलने आये तो देखा-माँ की शर उनकी देह से अलग पड़े है ,अजय को देखते ही उसे चक्कर आये और गिर पड़े ---





राज कुमारी आपने सखियों के साथ बैठी थी आपने कमरा में,प्रहरी आके बोले अजय आये उन्हें मिलने। बिदिशा
उसको लेन बोलै ,और दरवाज़ा की तरफ देखने लगे ,देखा अजय आ रहा है ,दोनों हाथो में एक थाली पकडे है और वह कपडा ढके है !राजकुमारी कुतूहल में खडी  हो गयी ,अजय अंदर आने लगे ,की अचानक उसकी पैर दरवाज़ा पे टकराये और वह गिर पड़े ,हाथो से थाली गिर गए ,माँ की कटी हुआ माथा रोल होते हुए  दीवार  पे टकराये  और बोल उठा --"बेटा ,तुझे लगे तो नहीं " .........

एहि हिंदी स्टोरी हमे सिखाते है माँ की प्यार, दुनिया में सबसे कीमती होते है,उसके आगे सब कुछ फीका लगते है।